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आचार्य पंडित श्री पवन शर्मा

माँ बगलामुखी का यह मंदिर मध्य प्रदेश के आगर मालवा जिले के नलखेड़ा कस्बे में लखुन्दर नदी के किनारे स्थित है।

आचार्य पंडित श्री पवन शर्मा नलखेड़ा स्थित बगलामुखी मंदिर के विद्वान ज्योतिषी एवं वैदिक शास्त्र मे निपुण पंडित है | आचार्यजी ने अपनी समस्त शिक्षा दीक्षा उज्जैन गुरुकुल मे श्रेष्ठ गुरुजनो के मार्गदर्शन मे प्राप्त की है | आचार्यजी बगलामुखी मंदिर नलखेड़ा के सुचिबद्ध पंडित है और नलखेड़ा मे निवास करते है |

आचार्यजी अपने अनुभव से विविध प्रकार के हवन पूजन और अनुष्ठान सम्पन कराते है – जैसे माँ बगलामुखी हवन, माँ बगलामुखी विशेष हवन, माँ बगलामुखी महा विशेष हवन, माँ बगलामुखी अनुष्ठान, ज्योतिष, वास्तु सलाह कार, शत्रु बाधा, विवाह बाधा, कालसर्प दोष पूजन, मंगल दोष भात पूजा, व्यापार वृद्धि, लक्ष्मी प्राप्ति, नवग्रह शांति, संतान प्राप्ति, न्यायिक बाधा, पितृ दोष आदि |


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माँ बगलामुखी मंदिर, नलखेड़ा

माँ बगलामुखी का यह मंदिर मध्य प्रदेश के आगर मालवा जिले के नलखेड़ा कस्बे में लखुन्दर नदी के किनारे स्थित है। यह मन्दिर तीन मुखों वाली त्रिशक्ति बगलामुखी देवी को समर्पित है। मान्यता है कि द्वापर युग से चला आ रहा यह मंदिर अत्यंत चमत्कारिक भी है। इस मन्दिर में देश विदेश और विभिन्न राज्यों से तथा स्थानीय लोग भी एवं शैव और शाक्त मार्गी साधु-संत तांत्रिक अनुष्ठान के लिए आते रहते हैं।

यहाँ बगलामुखी के अतिरिक्त माँ लक्ष्मी, कृष्ण, हनुमान, भैरव तथा सरस्वती की मूर्तियां भी स्थापित हैं। कहते हैं कि इस मंदिर की स्थापना महाभारत में विजय के उद्देश्य से भगवान कृष्ण की सलाह पर युधिष्ठिर ने की थी। मान्यता यह भी है कि यहाँ की बगलामुखी प्रतिमा स्वयंभू है। प्राचीन तंत्र ग्रंथों में दस महाविद्याओं का उल्लेख है जिनमें से एक है बगलामुखी। माँ भगवती बगलामुखी का महत्व समस्त देवियों में सबसे विशिष्ट है। विश्व में इनके सिर्फ तीन ही महत्वपूर्ण प्राचीन मंदिर हैं, जिन्हें सिद्धपीठ कहा जाता है। यह मन्दिर उन्हीं से एक बताया जाता है |

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मंदिर का इतिहास

माँ बगलामुखी मंदिर में भगवान अर्धनारीश्वर महाशंभू के अलौकिक रूप का दर्शन होता है, भाल पर तीसरा नेत्र मणि जड़ित मुकुट व चंद्र इस बात की पुष्टि करता है, माँ बगलामुखी को महारुद्र (मृत्युंजय शिव) की मूल शक्ति के रूप में माना जाता है, भगवती माँ बगलामुखी अष्टम महाविद्या है, माँ बगलामुखी माता का मंदिर मध्य प्रदेश के आगर मालवा जिले के, नलखेड़ा में लखुंदर नदी के किनारे स्थित है, मान्यता है कि कृष्ण की प्रेरणा से पांडवों ने यहां महाभारत युद्ध में विजय प्राप्ति के लिए साधना एवं माँ की आराधना की थी, मंत्रों के द्वारा जीवन में विजय प्राप्त कराने वाली विद्या है यह रात्रि की पर्यायवाचक है इसके सम्मुख सभी विद्याए तिरस्कृत होती है, यह तीनों शक्तियों ब्रह्मा विष्णु महेश से पूर्ण है।

वह संपूर्ण सिद्धियों की दात्री है और दूसरों की विपत्तियों का हरण करने वाली, शारीरिक रोगों को दूर करने वाली, यह विघ्न देने वालों का पलायन कराने वाली, यह त्रि शक्ति के रूप में विराजित है, जिनके दाये महालक्ष्मी और बाये माँ सरस्वती तथा केंद्र में माँ बगलामुखी विराजित है, माँ बगलामुखी आकर्षक श्रृंगारो से सुशोभित है, जिनका पूरा स्वर्णमय श्रृंगार है, इनका जो स्वरूप है एक हाथ में शत्रु की जिह्वा धारण कर रखी है और दूसरे हाथ में मुद्गल से शत्रु के ऊपर प्रहार कर रही है, मनुष्य के शत्रुओं में शामिल ऋण, रोग, पाप, दोष हमारे जन्म जन्मांतर में किए गए पाप यह सभी हमारे शत्रु होते हैं और माँ सभी ज्ञात और अज्ञात शत्रुओ से हमारी रक्षा करती है, माँ बगलामुखी मंदिर में तंत्र साधना के लिए विशेष संयोग है, मंदिर के चारों तरफ श्मशान व पास में नदी के कारण इसका और भी महत्व बढ़ गया है।



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माँ बगलामुखी मूल मंत्र

ॐ ह्रीं बगलामुखी सर्व दुष्टानाम वाचं मुखम पदम् स्तम्भय । जिव्हां कीलय बुद्धिम विनाशय ह्रीं ॐ स्वाहा ।।


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मंदिर खुलने का समय:- सुबह 7:00 बजे से शाम 9:00 बजे तक

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पता (Address)

आचार्य पंडित श्री पवन शर्मा

माँ बगलामुखी मंदिर, नलखेड़ा, जिला: अगर – मालवा,
मध्य प्रदेश

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Address

आचार्य पंडित श्री पवन शर्मा

Maa Bagalamukhi Temple, Nalkheda, District:
Agar- Malwa (MP)

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